लोग बवासीर होने के बाद दूसरों को बताने में काफी शर्म महसूस करते हैं। इसमें मरीजों को काफी दर्द सहन करना पड़ता है। बवासीर को Hemorrhoids या Piles (पाइल्स) भी कहा जाता है।
समय रहते बवासीर का इलाज ना किया जाए, तो इससे काफी तकलीफ बढ़ जाती है। यहां तक की बवासीर का ऑपरेशन (Piles surgery) कराने की भी नौबत आ सकती है। बवासीर के मरीजों को मल त्यागने में काफी कठिनाई होती है। यह समस्या 40 से 65 वर्ष की उम्र के लोगों को ज्यादातर होती है।
बवासीर के दो प्रकार (Types of piles) होते हैं खूनी बवासीर और बादी बवासीर। बवासीर एक अनुवांशिक समस्या है, अगर परिवार में किसी को बवासीर की समस्या रही हो, तो इससे परिवार के दूसरे व्यक्ति को भी बवासीर की समस्या हो सकती है।
अगर बवासीर के इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए साथ ही कुछ घरेलू नुस्खो की मदद से बवासीर का इलाज कर सकते हैं। बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज के बारे में जानने से पहले जानते हैं, की बवासीर क्या होता है?
बवासीर क्या होता है (Bavasir kya hota hai)
बवासीर (Bavasir) एक ऐसी बीमारी है, जिससे मरीज को बैठने में भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बवासीर की बीमारी में मरीज के मल त्याग के अंदरूनी हिसे और बाहरी हिसे में सूजन पैदा हो जाती है। जिस कारण मस्से की स्थिति बन जाती है। बवासीर के मरीज को मल त्याग के समय दर्द, खुजली होने के साथ-साथ खून आने लगता है।
बवासीर के प्रकार
खूनी बवासीर - खूनी बवासीर के मरीजों को मल के साथ खून आने लगता है। इसमें अंदरूनी हिस्से में मस्सा होता है, जो मल त्याग करते समय बाहर आ जाता है। इसके बाद अपने आप अंदर चला जाता है। अगर खूनी बवासीर पुराना होने लगता है। तो यह मस्सा हाथ से दबाने पर ही अंदर जाता है। जब अंतिम स्टेज होती है, तो यह हाथ से दबाने पर भी अंदर नहीं जाता।
बादी बवासीर - बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है। यह बवासीर गैस, कब्ज, पेट से संबंधित अनेक बीमारियों के कारण होता है। इसमें मरीज को जलन, खुजली, बेचैनी, किसी काम में मन ना लगना जैसी समस्या होने लगती है। इसमें मस्सा अंदर होने की वजह से घाव बन जाता है, इसे डॉक्टर अपनी भाषा में फिशर कहते हैं। इसमें मरीज को काफी जलन और पीड़ा महसूस होती है। बवासीर पुराना होने पर भगन्दर का रूप धारण कर लेता है। बवासीर, भगन्दर की आखिरी स्टेज में कैंसर जैसी बीमारी हो जाती है, जिसे रिक्टम कैंसर भी बोला जाता है। यह कैंसर बवासीर के मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है।
बवासीर के लक्षण (Bavasir ke lakshan)
- मल त्याग के दौरान खून निकलना
- गुदा के आसपास खुजली, दर्द महसूस होना
- गुदा मे या उसके चारो ओर एक गांठ बन जाना
- मल त्याग के बाद दर्द और बेचैनी महसूस होना
- हर समय जलन का महसूस होना
- किसी काम में मन ना लगना
बवासीर का इलाज (Bavasir ka ilaaj)
करेले का रस -
करेला खाने में जितना कड़वा होता है, उतने ही इसके फायदे गजब की देखने को मिलते हैं। अगर बवासीर के मरीज करेले के रस का सेवन करते हैं, तो उन्हें काफी आराम मिलता है। इसके लिए 20 ग्राम करेले के रस में 10 ग्राम मिश्री को मिलाकर 1 हफ्ते तक इसका सुबह सेवन करें। ऐसा करने से खून आने की समस्या दूर हो जाती है, और जलन, दर्द में भी आराम मिलता है।
गर्म पानी के फायदे -
बवासीर (Bavasir) के मरीजों को रोजाना सुबह गर्म पानी पीना चाहिए। गर्म पानी का सेवन करने से कब्ज से छुटकारा मिलता है, जिस कारण पेट आसानी से साफ हो जाता है। इससे बवासीर के मरीजों को काफी आराम मिलता है, इसके इलावा गर्म पानी के सेवन से रक्त वाहिकाए फैलने लगती है। इससे ब्लड सरकुलेशन में काफी सुधार होता है।
बवासीर में किशमिश के फायदे -
किशमिश की सहायता से आप बवासीर का घरेलू इलाज (Bavasir ka gharelu ilaaj) कर सकते हैं। इसके लिए 20 से 25 किशमिश को रात पानी में भिगोकर रख दें। सुबह पानी में ही किशमिश को अच्छी तरह पीस ले बाद में इसका सेवन करें। इससे बवासीर में काफी राहत मिलती है।
नारियल का तेल -
नारियल के तेल से बवासीर में आराम पाने के लिए सबसे अच्छा और आसान उपाय माना गया है। नारियल तेल नेचुरल मॉइश्चराइजर माना जाता है, यह हेमोराइड के लक्षणों को कम करने का काम करता है। इसलिए मस्सों पर नारियल तेल लगाने से काफी आराम मिलता है।
एलोवेरा का करें इस्तेमाल -
आप एलोवेरा से बवासीर का इलाज प्राकृतिक तरीके से कर सकते हैं। एलोवेरा में मौजूद एंटी इफ्लेमेटरी गुण जलन और सूजन को दूर करने का काम करते हैं, ऐसे में बवासीर के मरीजों को एलोवेरा जूस का जरूर सेवन करना चाहिए। इससे वेस्ट मटेरियल आसानी से बाहर निकलने लगता है। इसके अलावा बवासीर के मरीज एलोवेरा जेल को गुदे वाली जगह पर भी लगा सकते हैं।
सेब के सिरके का करे उपयोग -
सेब के सिरके का उपयोग करने से बवासीर में काफी राहत मिलती है। इसके लिए बादी बवासीर के मरीजों को रुई की मदद से सेब के सिरके को गुदे पर लगाना चाहिए। और खूनी बवासीर में एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए।
नींबू से बवासीर का इलाज -
नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। बवासीर (Piles meaning in hindi) के मरीजों को नींबू का प्रयोग करने से अनेक फायदे मिलते हैं। इसके लिए एक कटोरी में नींबू का रस निचोड़ कर रुई की मदद से इस रस को गुदे के क्षेत्र में लगाना चाहिए। इससे बवासीर के होने के कारण खुजली से छुटकारा मिलता है, साथ ही ठंडक मिलती है। इसके अलावा पाइल्स के मरीज रोजाना एक गिलास नींबू पानी भी पी सकते हैं।
बवासीर का रामबाण आयुर्वेदिक इलाज है बादाम -
बादाम फाइबर का एक अच्छा स्रोत माना जाता है, जो पेट को अनेक फायदे देने का काम करता है। इसलिए बवासीर के मरीजों को रोजाना सुबह 3 से 4 भीगे हुए बादाम खाने चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलता है, इसके अलावा बादाम का तेल प्रभावित क्षेत्र पर लगा सकते हैं। इससे खुजली और सूजन काफी हद तक कम हो जाती है।
बवासीर में गोंद कतीरा के फायदे -
गोंद कतीरा का सेवन करने से पेट से संबंधित अनेक बीमारियां दूर रहती है साथ ही कब्ज से भी छुटकारा मिलता है। बवासीर के मरीज गोंद कतीरा का सेवन कर सकते हैं। इससे उन्हें मल त्यागने में काफी आसानी हो जाती है, और साथ ही बवासीर की जलन में काफी आराम मिलता है।
सूखे अंजीर है कारगर -
अंजीर का सेवन करने से बवासीर के मरीजों को काफी आराम मिलता है। इसके लिए रात को दो से तीन सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर रख ले, सुबह इसका सेवन करें। इस प्रक्रिया को रोजाना करें 2 से 3 हफ्ते को फर्क महसूस होने लगेगा।
कपूर से बवासीर का इलाज -
कपूर एक नेचुरल कीटनाशक की तरह काम करता है। तेज गंध वाला एक स्वच्छ पदार्थ भी माना जाता है। इसके अलावा कपूर के उपयोग से बवासीर में वरदान की तरह साबित होता है। इसके लिए सौ ग्राम अरंडी के तेल में एक कपूर को अच्छी तरह घोल ले। इसके बाद इस मिश्रण को मस्से वाली जगह पर हल्के हाथों से लगाएं। बवासीर के मस्से को जड़ से खत्म करने का उपाय साबित हो सकता है।
तिल के बीज है लाभकारी -
आयुर्वेदिक के अनुसार तिल के बीज बवासीर के मरीजों के लिए काफी कारगर माने जाते हैं। इससे पाचन प्रक्रिया में काफी सुधार होता है। इससे दर्द, सूजन, जलन, खुजली की उत्तेजना काफी कम हो जाती है। ऐसे में तिल के बीज को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना लें बाद में मक्खन के साथ इस पेस्ट का सेवन करना चाहिए।
छाछ का करे सेवन -
बवासीर के मरीजों को छाछ का सेवन करना चाहिए। बवासीर में आराम दिलाने के लिए काफी अच्छा उपाय माना जाता है। इसके लिए एक चौथाई चम्मच अजवाइन और एक चुटकी नमक को एक गिलास छाछ में मिलाएं। इसके बाद इसका सेवन कर ले, रोजाना इसका सेवन करने से बवासीर (Bavasir) में आराम मिलता है।
बवासीर का इलाज है मूली -
मूली का इस्तेमाल लगभग सभी के घरों में होता है, इसके फायदे के बारे में शायद कम लोग ही जानते होंगे। मूली के इस्तेमाल से बवासीर की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। बवासीर के मरीजों को 20 ग्राम मूली के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर इसका रोजाना सेवन करना चाहिए। यह उपाय करने से मल का त्याग करते समय खून आना बंद हो जाता है।
रोजाना पपीता खाएं -
पपीता खनिज और विटामिन इसका काफी अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके सेवन से परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है, साथ में यह बवासीर के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसलिए पपीते को नाश्ते के साथ जरूर शामिल करना चाहिए।
बवासीर कैसे होता हैं (Bavasir kaise hota hai)
- ज्यादा मिर्ची मसाले वाला भोजन बवासीर का कारण हो सकता है।
- शराब और स्मोकिंग करने से भी बवासीर हो सकता है।
- जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें बवासीर होने का खतरा बढ़ जाता है। कब्ज में मल कठोर और सुखा जाता है, जिसके कारण मल त्यागने में काफी परेशानी होने लगती है। इससे रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है। यह रक्तवाहिनिया फूलकर बाहर आ जाती है बाद में यह बवासीर का मस्सा बन जाता है।
- मोटापे से ग्रसित लोगों को बवासीर होने का खतरा ज्यादा होता है।
- ज्यादा देर तक एक जगह पर खड़े रहना या बैठने से भी बवासीर की समस्या हो सकती है।
बवासीर में किस का सेवन करें
- पत्तेदार सब्जियों में अनेक प्रकार के मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं, जो बवासीर के लक्षणों को कम करने का काम करते हैं। इसके लिए आप पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, गाजर, पत्ता गोभी, शलगम, खीरा, ब्रोकली का सेवन कर सकते हैं।
- हर्बल चाय का सेवन करने से मल त्यागने में काफी आसानी हो जाती है, साथ ही सूजन दर्द में भी काफी आराम मिलता है। आप बाजार से हर्बल चाय खरीद सकते हैं, हर्बल चाय का सेवन करने से पहले आप डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।
- फलों में विटामिन, मिनरल्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अनेक फायदे देने का काम करते हैं। बवासीर में राहत दिलाने के लिए फल मददगार साबित हो सकते है। इसके लिए केला, सेब, संतरा, अंगूर, पपीता, चीकू अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
- साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, होल व्हीट फाइबर का की अच्छी मात्रा में पाया जाता है। बवासीर के मरीजों को साबुत अनाज सेवन करना चाहिए।
बवासीर को रोकने के लिए जीवन शैली में करें 15 बदलाव
- गुस्से और तनाव से रहे दूर।
- सुबह जल्दी उठे और रात को जल्दी सोए।
- दिन में तीन या चार बार भोजन जरूर करें।
- कोल्ड ड्रिंक्स से बनाएं दूरी।
- फास्ट फूड का सेवन करने से करें परहेज।
- हफ्ते में एक बार उपवास जरूर करें।
- हमेशा खुश रहने की कोशिश करें।
- शराब सिगरेट तंबाकू या किसी प्रकार के नशे से दूर रहें।
- रोजाना सुबह ठंडे पानी से स्नान करें।
- खाना खाने के बाद 900 से 1000 कदम पैदल चलें।
- रोजाना सुबह मेडिटेशन जरूर करें।
- शरीर को मजबूत बनाने के लिए शाम को कसरत कर सकते हैं।
- रोजाना ज्यादा से ज्यादा पानी पिए।
- खाना हमेशा अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- हमेशा खुश रहने का प्रयास करें।
बवासीर में परहेज
- फ्रेंच, फ्राइज, समोसे, कचोरी, तली चीजें चीजें, फास्ट फूड ना खाए।
- सफेद ब्रेड के सेवन से बवासीर में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिस कारण कब्ज की समस्या हो सकती है। इसलिए बवासीर के मरीजों को सफेद ब्रेड का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
- गुटखा, सिगरेट, अल्कोहल का सेवन करने से बवासीर की समस्या ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए इन सब चीजों का सेवन करना बंद कर देना चाहिए।
- कॉफी और चाय कैफ़ीन मात्रा में पाया जाता है, जो बवासीर की स्थिति को बिगाड़ सकता है। इसलिए चाय और कॉफी का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।
बवासीर के नुकसान
- समय पर अगर बवासीर का इलाज ना किया जाए तो फिस्टुला और फिशर में बदल सकता। यह बवासीर की आखिरी स्टेज होती है, अगर इसको नजरअंदाज किया जाए तो यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का रूप ले लेता है। इस स्थिति में मौत होने का खतरा बढ़ जाता है।
- बवासीर के मरीजों को उठने बैठने कोई बारी काम करते समय काफी दर्द सहन करना पड़ता है। कभी-कभी तो तेज दर्द के कारण खून भी निकलने लगता है।
- बवासीर के मरीजों को कब्ज के कारण पेट से संबंधित अनेक बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।
सवालों के जवाब
Q. बवासीर में दूध पीना चाहिए या नहीं?
A. ज्यादातर डॉक्टरों का यही कहना है, कि बवासीर में दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण कब्ज की शिकायत हो सकती है।
Q. क्या बवासीर खतरनाक बीमारी है?
A. बवासीर की समस्या बेशक आम समस्या है, लेकिन यह आगे चलकर खतरनाक रूप धारण कर लेती है। अगर समय रहते इसका इलाज ना किया जाए तो ऑपरेशन की नौबत आ सकती है।
Q. बवासीर में अंडा खाना चाहिए या नहीं?
A. बवासीर के मरीज अंडे का सेवन कर सकते हैं, बवासीर के मरीजों को रोज दो से तीन ही अंडे खाने चाहिए। लेकिन अंडा खाने से पहले एग योल्क को निकाल देना चाहिए।
Q. बवासीर से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A. बवासीर के कारण शरीर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे की खुजली होना, किसी काम में मन ना लगना, दर्द महसूस होना, बेचैनी, उठने बैठने में दिक्कत होना।
Q. बवासीर में आलू खाना चाहिए कि नहीं?
A. बवासीर के मरीज आलू का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा भोजन करने से पहले कच्चे आलू के रस का भी सेवन कर सकते हैं।
Q. बवासीर की चिंता कब करनी चाहिए?
A. यदि आपको मलाशय में जलन खुजली का अनुभव महसूस होता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
Q. बवासीर में चावल खाना चाहिए या नहीं?
A. बवासीर में सफेद चावल की बजाय ब्राउन चावल का सेवन करना चाहिए, ब्राउन चावल बवासीर के मरीजों को अनेक फायदे देने का काम करते हैं।
